आजकल लंबे समय तक मोबाइल और लैपटॉप पर काम करने की वजह से कंधों में जकड़न आम समस्या बन गई है। अगर आप भी शोल्डर पेन, जकड़न या मूवमेंट की कमी महसूस करते हैं, तो Top 5 Yoga Poses for Shoulder Mobility आपके लिए बेहद फायदेमंद हो सकते हैं। ये योगासन कंधों की ताकत बढ़ाने के साथ-साथ लचीलापन भी सुधारते हैं।
शोल्डर मोबिलिटी बेहतर होने से न केवल दर्द कम होता है, बल्कि आपकी बॉडी पोस्टर और रोजमर्रा की गतिविधियां भी आसान हो जाती हैं। सही तरीके से और नियमित अभ्यास करने पर कुछ ही हफ्तों में फर्क महसूस किया जा सकता है।
कंधों की मोबिलिटी क्यों जरूरी है?
कंधा शरीर का सबसे ज्यादा मूवमेंट देने वाला जोड़ है। अगर इसमें जकड़न आ जाए तो गर्दन, पीठ और बाहों पर भी असर पड़ता है।
■ बेहतर पोस्टर बनाए रखने में मदद
■ गर्दन और ऊपरी पीठ का तनाव कम
■ चोट का जोखिम घटता है
■ रोजमर्रा के काम आसान होते हैं
योग कंधों को सुरक्षित तरीके से स्ट्रेच और मजबूत करता है।
1. अधो मुख श्वानासन
यह पोज़ कंधों और बाहों को मजबूत बनाता है। हथेलियों को जमीन पर मजबूती से दबाएं और कूल्हों को ऊपर उठाएं। इससे शोल्डर जॉइंट खुलते हैं और ताकत बढ़ती है।
2. गोमुखासन (हाथों की स्थिति)
पीठ के पीछे एक हाथ ऊपर से और दूसरा नीचे से लाएं। उंगलियों को पकड़ने की कोशिश करें। यह कंधों की गहराई तक स्ट्रेच देता है।
3. गरुड़ासन (हाथों की स्थिति)
दोनों हाथों को एक-दूसरे में लपेटें और कोहनियों को ऊपर उठाएं। इससे शोल्डर ब्लेड के आसपास की मांसपेशियां सक्रिय होती हैं।
4. भुजंगासन
पेट के बल लेटकर ऊपरी शरीर को ऊपर उठाएं। यह छाती खोलता है और आगे झुके कंधों को संतुलित करता है।
5. डॉल्फिन पोज़
फोरआर्म्स को जमीन पर रखकर कूल्हों को ऊपर उठाएं। यह कंधों को मजबूती देने के लिए बेहतरीन आसन है।
अभ्यास के दौरान ध्यान रखें
जल्दबाजी न करें और धीरे-धीरे स्ट्रेच बढ़ाएं।
अगर तेज दर्द हो तो तुरंत रुक जाएं।
सांस पर ध्यान दें और हर पोज़ को 20 से 30 सेकंड तक होल्ड करें।
सप्ताह में कम से कम 4 दिन अभ्यास करें।
कितने समय में मिलेगा फायदा?
नियमित अभ्यास से 3 से 4 हफ्तों में कंधों की जकड़न कम हो सकती है। ताकत और लचीलापन धीरे-धीरे बढ़ता है, इसलिए निरंतरता जरूरी है।
निष्कर्ष
Top 5 Yoga Poses for Shoulder Mobility कंधों को मजबूत, लचीला और दर्द-मुक्त बनाने का आसान तरीका है। अगर आप रोज थोड़ा समय निकालकर इन योगासनों का अभ्यास करें, तो बेहतर पोस्टर और कम तनाव का अनुभव कर सकते हैं। सही तकनीक और नियमितता ही सफलता की कुंजी है।